24hnbc 2004 रवि कांत राय हत्या केस में आजीवन कारावास का सजायाफ्ता है रंजन गर्ग
Wednesday, 19 Jan 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । 2004 के जिस मामले में रंजन गर्ग पिता प्यारेलाल गर्ग जमानत पर छूटकर बाहर आया हुआ है उस प्रकरण का पूरा विवरण कुछ इस प्रकार है 2 अगस्त 2004 सुबह 11:30 बजे रवि कांत राय बस मालिक शशिकांत के साथ श्री पाल गुर्जर के लाल खदान फाटक स्थित पान ठेले पर बैठा था तब क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर वहां आए और उन्होंने एक नाम लेकर बताया कि फला फला आदमी साइकिल स्टैंड का ₹15000 लेकर भागा है शाम को बोलेरो क्रमांक सीजी 10 , ए 4590 में सवार होकर रंजन गर्ग, शशिकांत गर्ग, मोहन नेपाली, बिल्ल उर्फ सुनील श्रीवास, बट्टू उर्फ विजय निकम, बबुआ उर्फ गल्ला प्रसाद कुशवाहा आए और उनमें से रंजन गर्ग ने रवि कांत राय को गोली मार दी इस मामले में तोरवा पुलिस ने 147 , 148 , 302, 34, 149 के तहत मामला दर्ज किया । गर्ग गैंग का दहशत कुछ इतना ज्यादा था की पुलिस को सभी आरोपियों की गिरफ्तारी में 1 साल लग गया असल में गर्ग गैंग अपराध करने के बाद उत्तरप्रदेश चल देता था और वहीं से क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता था इनकी गिरफ्तारी के बाद सत्र न्यायालय में प्रकरण चला पहली बार ऐसा हुआ कि नागरिकों ने रंजन गर्ग के खिलाफ गवाही में खड़ा होना स्वीकार किया तभी राय परिवार की गवाही के कारण सत्र न्यायालय से सभी सातों आरोपियों को आजीवन कारावास हुआ। 22 सितंबर 2007 को महेंद्र सिंह राठौर न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को सजा सुनाई और 1-1 हजार रुपए अर्थदंड भी आरोपित किया 6 नवंबर 2007 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डीबी जस्टिस सुनील सिन्हा व राधेश्याम शर्मा के न्यायालय में इस मामले की अपील सुनी गई और रंजन गर्ग, शशिकांत गर्ग का आजीवन कारावास बरकरार रहा । इसी मामले में रंजन गर्ग को उच्चतम न्यायालय से जमानत प्राप्त हुई है। जमानत में देवरीखुर्द क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 43 के पार्षद परदेसी राज का शपथ पत्र काम आया और उसी को आधार बनाकर सर्वोच्च न्यायालय ने सशर्त जमानत दी है हर महीने रंजन गर्ग को तोरवा थाना में हाजिरी लगानी है सवाल उठता है कि 3 माह पूर्व जमानत पर छूटे रंजन गर्ग को अपने जान का भय क्यों दिखने लगा कहीं इसके पीछे उन्हीं लोगों का हाथ तो नहीं है जिन्होंने किसी विशेष उद्देश्य को पूरा कराने के लिए रंजन गर्ग को जमानत दिलाई है जिस तरह से अखबारों में बार- बार गैंगवार की बात उछाली जा रही है उसके पीछे भी कितनी सच्चाई है रंजन गर्ग, गर्ग परिवार में पांच भाई है और पांचों का जरायम पैसे से गहरा ताल्लुक रहा है रंजन गर्ग की जमानत के बावजूद शशिकांत गर्ग , मोहन नेपाली तो जेल में ही हैं सूत्र बताते हैं कि इन दिनों बिलासपुर जिले के बाहर पड़ोसी जिलों के ठेकों में गर्ग की धमक फिर से दिखाई देने लगी है।