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24hnbc पुनः निर्वाचित हुए मध्यप्रदेश में माकपा के सचिव जोगिंदर सिंह
Tuesday, 18 Jan 2022 18:00 pm
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समाचार - भोपाल
भोपाल। कॉमरेड एस कुमार की स्मृति को समर्पित सम्मलेन स्थल पर 16-17-18 जनवरी को हुआ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का सोलहवां मध्यप्रदेश राज्य सम्मेलन पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी के प्रेरणादायक संबोधन, नए अभियानों, आंदोलनों और संघर्षों के लक्ष्य को निर्धारित करने तथा नए राज्य नेतृत्व का निर्वाचन करने के साथ कल संपन्न हो गया। निवर्तमान राज्य सचिव जसविंदर सिंह को पुनः राज्य सचिव निर्वाचित किया गया है। '
सम्मेलन में दिए अपने समापन भाषण में माकपा के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी ने देश और दुनिया के अनेक उदाहरण देते हुए बताया कि जनता के संघर्ष मुश्किल से मुश्किल हालतों और बर्बर से बराबर तानाशाहों के राज में चले हैं और आखिर में जनता ही जीती है -- तानाशाह और उनकी बर्बरता पराजित हुयी है। मेहनतकश जनता अपनी तकलीफों से निजात पाने के लिए कुर्बानी देना और उसके आधार पर सफलता की मंजिल फतह करना जानती है।  
वाम के कमजोर होने के मिथक को साफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि संसदीय शक्ति ही माकपा या वामपंथ की ताकत का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता। असल सवाल है जनता के साथ रिश्ते और उनके जीवन के सवालों को लेकर बिना किसी विराम के किये जाने वाले संघर्ष ; जिनमे वाम सबसे आगे है। हाल में हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन और 23-24 फरवरी को 4 वर्षों में होने जा रही चौथी राष्ट्रीय हड़ताल में वाम की भूमिका यह स्पष्ट करने के लिए काफी है। आने वाले दिनों में इसे और तेज करना है। उन्होंने आशा जताई कि मध्यप्रदेश में भी इन्ही के साथ जनता के स्थानीय सवालों पर आंदोलन और संघर्ष करते हुए सीपीएम तेजी के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि तीन दिन तक हुयी चर्चा और विमर्श में सुनाई गयी संघर्ष और उपलब्धियों की कहानियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश की पार्टी में वह सक्षमता है। इसके सुव्यवस्थित और सुनियोजित इस्तेमाल की आवश्यकता है।  
सम्मेलन के दूसरे दिन बोलते हुए पोलिट ब्यूरो सदस्य पूर्व सांसद सुभाषिणी अली ने भाजपा राज में सामाजिक अन्याय के अत्यंत चिंताजनक तेजी से बढ़ने की असलियत रखी। उन्होंने कहा कि यह मनुवाद की बहाली की साजिशों का हिस्सा है। मध्यप्रदेश में इस तरह की घटनाएं और भी ज्यादा हैं, क्योंकि इसे आरएसएस-भाजपा ने अपनी प्रयोगशाला बनाकर रख दिया है। सीपीएम और वामपंथ को शोषण के इस सामाजिक रूप के खिलाफ भी लड़ना होगा, क्योंकि यह भी वर्गीय शोषण का ही हिस्सा है। अपने ओजस्वी भाषण में स्वतन्त्रता संग्राम की शानदार परंपरा से जुडी माकपा नेत्री सुभाषिणी अली ने मोदी सरकार द्वारा अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए की जा रही विभाजनकारी साम्प्रदायिकता के षडयंत्रों के बारे में भी बताया और इनके बारे में जनता को सचेत करने का आव्हान किया। मध्यप्रदेश से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने अनेक सुझाव भी दिए और जनता के सभी तबकों और समुदायों के बीच आंदोलन तथा संगठन विस्तार का आव्हान किया। 
भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा गणतंत्र समारोह में भेजी स्वामी नारायण के धर्मनिरपेक्ष समावेशी कृतित्व आधारित झांकी को निरस्त कर आदि शंकराचार्य की झांकी तैयार करने की सलाह को दोनों नेताओं ने हिन्दुत्ववादी एजेंडे का हिस्सा बताया और इसके लिए मोदी सरकार की भर्त्सना की।
सम्मेलन ने आख़िरी सत्र में 30 सदस्यीय राज्य समिति का निर्वाचन किया। इसने निवर्तमान राज्य सचिव जसविंदर सिंह को पुनः अपना सचिव निर्वाचित किया। सचिव सहित 11 सदस्यीय राज्य सचिव मण्डल और पार्टी काँग्रेस के प्रतिनिधि भी निर्वाचित किये गए।  
सम्मेलन ने 23 - 24 फरवरी को होने वाली देशव्यापी मजदूर हड़ताल का समर्थन करते हुए अपने सभी जनसंगठनों तथा सदस्यों से इसे समूची जनता की आम प्रतिरोध कार्यवाही में बदलने का आव्हान किया। नई शिक्षा नीति के विरोध में भी प्रस्ताव पारित करते हुए मध्यप्रदेश के इसे लागू करने वाला पहला प्रदेश बनाने के लिए प्रदेश सरकार की भर्त्सना की गयी। इस शिक्षा नीति को शिक्षा के व्यापारीकरण को बढ़ाने और बहुमत परिवारों को शिक्षा से वंचित करने का जरिया बताया गया है। सम्मेलन में समाज के विभिन्न तबकों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें मजदूरों की हालत, अल्पसंख्यकों पर हमले, महंगाई, मप्र सरकार हर मोर्चे पर असफल, सामाजिक उत्पीड़न, कृषि संकट, बेरोजगारी आदि पर प्रस्ताव प्रमुख है।