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24hnbc विश्व गुरु के शिक्षा संस्थानों की हालत पतली 1 लाख 10 हजार स्कूलों में मात्र एक शिक्षक
Wednesday, 29 Dec 2021 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। स्वयं को विश्व गुरु की पदवी से विभूषित कर भारत देश की सत्ता यह भूल गई है कि देश के 110000 स्कूलों में एक-एक ही शिक्षक है पर पदवी तो स्वयंभू रूप से ग्रहण कर ली गई। 2021 देश के युवाओं के लिए जितना बुरा बीता है 2022 उससे भी बुरा बीतेगा । पकौड़ा उद्योग का रेवड़ी खूब बटा अब हिंदू-मुसलमान का बताशा बाठकर काम चलाया जाएगा । देश में 740 जिले हैं और हर जिले में 175000 डिग्री धारी बेरोजगार है देश के राजनैतिक दल बड़े खुश हैं क्योंकि यही बेरोजगार उसकी रैलियों में झंडा उठाकर आते हैं । देश की कुल जीडीपी से सिर्फ 0.7% राशि शोध पर खर्च की जाती है तमाम बेरोजगार यह भी समझें कि जिस जातिवाद की राजनीति में उन्हें घुमाया जाता है उस में रोजगार की क्या स्थिति है। ओबीसी में 5 - 6 करोड़ बेरोजगारी, दलित में 3 करोड़ और उच्च जातियों में 3 करोड़ 50 लाख, डिग्री धारी बेरोजगार है। लड़कियों में 2 करोड 22 लाख लड़कियां देश के विभिन्न रोजगार दफ्तरों में पंजीकृत हैं यूपीएससी में 7 सालों में 25627 लोगों को नौकरी दी और इन परीक्षाओं में कुल 800000 लोग शामिल हुए इसी तरह एसएससी जिसे हम स्टाफ सिलेक्शन कमीशन कहते हैं ने 7 साल में 2 लाख 601 लोगों को नौकरी दी और इस परीक्षा में 12 करोड़ बेरोजगार शामिल हुए आप " भाइयों बहनों और मित्रों " के संवाद में अटके रहिए केंद्र सरकार के पास कुल 4000000 स्वीकृत पद है जिसमें से मात्र 2900000 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं देश में एक लोकसभा सीट या एक विधानसभा सीट खाली हो जाती है तो चुनाव आयोग उसे भरने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करता है। नेता भी एक सीट को पाने के लिए कई करोड़ रुपए खर्च कर देते हैं यदि वह सीट कुछ ज्यादा दिन तक खाली रह जाती है तो आयोग पर आरोप लगने लगते हैं किंतु केंद्र सरकार में ही 1200000 पद खाली पड़े हैं तो उसे भरने के लिए कोई आगे नहीं आता यदि देश के किसी शहर में बेरोजगार अपने नौकरियों के लिए सड़क पर आ जाए तो उसे पुलिस डंडे से पीटना और वाटर कैनन की बौछार करना अपना अधिकार मानती है। जातिवाद के अनुसार ही देखें तो केंद्र सरकार के अधीन दलितों के लिए आरक्षित पद 14300 खाली है इसी तरह एसटी के लिए खाली पद 12000 और ओबीसी के 15000 पद खाली हैं उच्च शिक्षा के क्षेत्र मे सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के 13000 पद खाली हैं और गैर शैक्षणिक पदों में 24000 पद खाली हैं अब लगे हाथ यह भी समझ ले कि इस स्थिति में कोई अंतर नहीं आने वाला केंद्र सरकार अपने बजट का 65% खर्च वेतन पेंशन और इमारतों के रखरखाव पर खर्च करती है 8% यात्राव्य है 12% प्रचार में खर्च हो जाता है शेष राशि जो बच रही है उससे तो केवल बताशा ही बांटा जा सकता है। प्रधानमंत्री का अपना प्रचार खर्च प्रति वर्ष 1000 करोड़ रुपए का है। इन सब परिस्थितियों को देखकर ही 2021 में 530000 लोग उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए ऋण लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जाने वालों की, का प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है इन सब परिस्थितियों में युवा ही सोचे जब 2 साल से शिक्षा के तमाम केंद्र बंद हैं तो जिन कामों पर वह अपनी ऊर्जा लगा रहा है उसेसे हटकर क्या और कोई बेहतर काम नहीं किया जा सकता।