24hnbc छत्तीसगढ़ के जंगल में अकबर का एक ही रत्न " संजय "
Wednesday, 15 Dec 2021 00:00 am
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समाचार - बिलासपुर
वैसे तो बीते कई दिनों से साहबों की किसी खास निराली बात की चर्चाएं नहीं आई है मगर आज के ये खास खबर आपको काफी कुछ याद दिला सकता है। छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल में 8 साल पहले रेंजर की पद पर पदस्थ हुए साहब को प्रमोशन देकर के एसडीओ बनाया गया उसके बाद इस एसडीओ को उसी वनमण्डल का प्रभारी डीएफओ बना दिया गया है। इन सब में एक खास बात यह है कि अनुविभागीय अधिकारी की हैसियत से वे खुद प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं और उसके बाद वही डीएफओ बनकर अप्रूव भी कर दिया करते हैं।
राज्य में इस प्रकार से चल रहे हैं प्रभारवाद का मुद्दा विधानसभा मे भी उठ चुका है ऐसा कहा जा रहा है कि मरवाही वन मंडल में डीएफओ के पद पर जूनियर अफसर और लोरमी उप वन मंडल अधिकारी के पद पर वरिष्ठ अफसर की नियुक्ति के साथ ही राज्य में सभी वरिष्ठ साहबो को दरकिनार कर जूनियर अधिकारियों को पदस्थ करने का खुला खेल चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार मरवाही वनमंडल में वर्ष 2014 में रेंजर संजय त्रिपाठी को पदस्थ किया गया था उसके बाद वर्ष 2020 में उसी जगह पर उनका एसडीओ के पद पर प्रमोशन भी कर दिया गया, महज 1 साल बीतने के बाद उन्हें डीएफओ का भी प्रभार दे दिया गया है और गौर करने वाली बात यह है कि उनसे वरिष्ठ एसडीओ केपी डिंडोर उसी पद पर पदस्थ है मगर उनका प्रमोशन नहीं हुआ है।संजय त्रिपाठी की बहुत सी शिकायतें वनमंत्री सहित मुख्यमंत्री कार्यालय में भी की जा चुकी है।शिकायत के मामले पर आज तक कोई भी कार्यवाही प्रदेश के मुख्यमंत्री व वनमंत्री के द्वारा नही की गई है।उल्टा संजय त्रिपाठी के ऊपर सरकार पूरी तरह से मेहरबानी करने में लगी हुई है।जिस अफसर के ऊपर वन विभाग को कार्यवाही करने की आवश्यकता थी उसी अफसर को प्रमोट करने का काम किया जाना अपने आप में सोचनीय प्रश्न है।मरवाही क्षेत्र में करोड़ो के कामो को पेपर में करने की कई बार शिकायते ग्रामीणों ने कर चुकी है।अब तो ऐसा लग रहा है कि संजय त्रिपाठी प्रदेश के वनमंत्री मोहम्मद अकबर के आंख के तारे बन गए है।आंख का तारा बनने का आशय तो आप सभी जानते ही है।अच्छी व्यवस्था करने वाला ही आंख का तारा बनता है।इन सभी गुणों में संजय त्रिपाठी को महारथ हासिल है।
बीते सोमवार को मरवाही मंडल सहित पूरे राज्य भर में 15 जूनियर अधिकारियों को सीनियर अफसरों के पद के पोस्टिंग देने के मामले को उठाया गया। केशकाल के विधायक संतराम नेताम ने वन विभाग में सीनियर अफसरों के रहते हुए जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों पर अतिरिक्त प्रभार दिए जाने वाले मामले पर सवाल किए। राज्य के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने इस सवाल का जवाब देते हुए सदन को जानकारी भी दी, उन्होंने यह कहा कि पूरे राज्य में मरवाही के साथ ही दूसरे जगहों पर भी 15 जूनियर अधिकारियों को सीनियर अधिकारियों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। मंत्री जी ने यह भी कहा की जूनियर अफसरों को अतिरिक्त प्रभार देने के कारण पांच अधिकारी प्रभावित है।
कई वरिष्ठ अधिकारी अब हो चुके हैं जूनियर
इस सरकार में वन विभाग में प्रभारवाद का ऐसा खेल चल रहा है जिसकी खामियाजा राज्य भर के कुल 5 वरिष्ठ अधिकारियों को झेलना पड़ रहा है सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात यह है कि इन्हें अपने ही जूनियर के नीचे काम करना पड़ रहा है। जिन भी अधिकारियों को इस वजह से प्रभावित होना पड़ा है उनमें मुख्य वन संरक्षक एसपी पैकरा को वन संरक्षक कार्ययोजना वन मंडल कांकेर, मुख्य वन संरक्षक बी पी सिंह को वन संरक्षक नया रायपुर अटल नगर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उप वन संरक्षक, चूड़ामणि सिंह को उप वन मंडलाअधिकारी, लोरमी वन मंडल मुंगेली, भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी उप वन संरक्षक पुष्पलता को उप वन मंडल अधिकारी डोंगरगढ़ वन मंडल खैरागढ़ नियुक्त किया गया है। मरवाही वन मंडल में वर्ष 2020 के सहायक वन संरक्षक संजय त्रिपाठी को वन मंडल अधिकारी मरवाही का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
वनमंत्री अकबर अपने विभाग को ईमानदारी से चलाने का डंका पीटते है,पर वास्तविकता कुछ और ही नजर आ रहा है।संजय त्रिपाठी पर ही इतनी मेहरबानी किस लिए की जा रही है।