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24hnbc हाईकोर्ट ने चार करोड़ का मुआवजा देने पर लगाया रोक
Monday, 08 Nov 2021 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
हाईकोर्ट के डिविजन बैंच ने 4 करोड़ का मुआवजा देने पर लगाया रोक 
बिलासपुर ।भूमि अधिग्रहण का मुआवजा दिए जाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल, नगर पालिक निगम राजनांदगांव के खिलाफ जमीन मालिक रश्मि गौरी भोजानी एवं अन्य ने जमीन अधिग्रहण कर मुआवजा न देने को लेकर याचिका दायर की थी। यह रकम 4 करोड़ 3 लाख 40 हजार रुपए 12 फीसदी ब्याज के साथ देने के आदेश दिए गए थे। सिंगल बेंच ने इस मामले में जमीन मालिकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दी है।
नगर पालिक निगम राजनांदगांव की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्‍ता संदीप दुबे ने बेंच को अवगत कराया कि उक्‍त याचिकाकर्ताओं की जमीन का अधिग्रहण किया ही नहीं गया है। सिंगल बेंच में केस की सुनवाई के दौरान भी जमीन मालिकों ने तथ्‍य छिपाए और बगैर निगम का पक्ष सुने ही मुआवजा भुगतान के आदेश दे दिए गए। अधिवक्‍ता ने पक्ष रखा कि याचिकाकर्ता द्वारा भ्रामक एवं झूठी जानकारी देते हुए भूमि अधिग्रहण की बात कही गई थी। जबकि निगम ने याचिकाकर्ताओं की भूमि का अधिग्रहण ही नहीं किया है।
2014 में लगाई थी याचिका
बताया गया कि याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2014 में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में अधिग्रहण का मुआवजा हासिल करने याचिका लगाई थी। जबकि नगर निगम ने याचिकाकर्ताओं को पहले ही सूचित कर दिया था कि उनकी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है। अपील में यह भी बताया गया है कि 2020-21 में राजनांदगांव के सांसद के पत्र के आधार पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चालू की गई थी। जिस पर याचिकाकर्ता रश्मि भोजानी ने अपने वकील अनूप मजुमदार के माध्यम से उच्च न्यायालय के सिंगल बेंच में कहा कि हमारे जमीन का अधिग्रहण कर लें और मुआवजा प्रदान करें। लेकिन, सिंगल बेंच को भ्रमित करते हुए सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनकी जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है और उन्‍हें मुआवजा मिलना चाहिए।
अपील में कहा गया है कि सिंगल बैंच ने नगर निगम को नोटिस जारी किए बिना ही याचिकाकर्ताओं के तथ्य को सत्य मानते हुए एकपक्षीय आदेश जारी कर मुआवजा राशि देने का आदेश दिया। नगर निगम के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन के अधिवक्ता से भी जवाब मांगा था। शासन की ओर से स्‍पष्‍ट किया गया कि याचिकाकर्ताओं की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है।
सड़क के लिए जमीन नहीं छोड़ी
नगर निगम के अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 1990 में पहले नगर निगम में अपनी कृषि भूमि का मद परिवर्तन कराने के लिए आवेदनपत्र जमा किया था। जिस पर नगर निगम ने उन्हें सशर्त अनुमति दी थी। शर्त यह थी कि उन्हें सड़क के लिए 60 फीट जमीन छोड़ना होगा। इसके लिए उन्होंने सहमति भी दी थी। अब मकान बनाने के बाद सड़क की जमीन के लिए याचिकाकर्ता कोर्ट को गुमराह कर मुआवजा राशि मांग रहे हैं।