24 HNBC News
24hnbc आखिर जिला कांग्रेस की परेशानी क्या है
Saturday, 30 Oct 2021 00:00 am
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । दशक के बाद शहर बिलासपुर विधानसभा को कांग्रेस का विधायक मिला और लगातार उसी पार्टी से जुड़े हुए पदाधिकारी निर्वाचित विधायक का अपमान करते रहते हैं ऐसा क्यों.....? इस बार जिस पदाधिकारी ने थाने के भीतर बैठकर माननीय विधायक को अपशब्द कहे वह तो इसके पूर्व जब कांग्रेस सत्ता में नहीं थी तो कोनी थाने के बाहर अपनी ही पार्टी को और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को अपशब्द से नवाज चुका है । सिर्फ याद करने की देर है उस वक्त शहर कांग्रेस की कमान नरेंद्र बोलर जी के हाथ में थी और ये सज्जन ब्लॉक कॉन्ग्रेस 2 के अध्यक्ष थे, तब भी इनके विरुद्ध कार्यवाही हुई और इनका पद गया। असल में इस बार का पूरा झगड़ा मगरपारा स्थित एक जमीन विवाद में 5 एससी महिलाओं के द्वारा की गई शिकायत है और उस शिकायत पर न तो महकमा कार्यवाही कर रहा है और ना ही उस मुद्दे पर जनप्रतिनिधि बात कर रहे हैं बड़े शानदार तरीके से महिलाओं को अपशब्द कहने वाले और उन्हें जान से मारने की धमकी देने वाले नेता ने समझदारी के साथ थाने में बैठकर मूल मुद्दे को ही घुमा दिया और स्वर्ण विधायक को अपशब्द कहकर स्वयं को शहर का अकबर घोषित कर दिया। अब पूरा मुद्दा सवर्ण विरुद्ध अल्पसंख्यक हो गया और यही तो षड्यंत्र है यह बात हमेशा कांग्रेस के वह लोग करते हैं जिन्हें फूल छाप कांग्रेसी कहा जाता है और इसीलिए तो इन्हें फूल छाप कांग्रेसी कहा जाता है ऐसे पूरे नेता बरसों से कांग्रेस में बैठे हैं और किन्हीं दूसरों के द्वारा पोषित और पल्लवित हैं । यदि कांग्रेस में इन्हें कोई तवज्जो नहीं होती और इन्हें जन सेवा करनी होती तो यह पार्टी छोड़कर उस पार्टी में चले जाते जहां से इन्हें पुष्पित और पल्लवित किया जाता है। किंतु पुष्पित और पल्लवित होने की पहली शर्त यही है कि आपको कांग्रेस में ही रहना है और वही की जड़ों में मट्ठा डालना है जो काम ऐसे नेता बखूबी कर रहे हैं अब समझे जिला कांग्रेस की राजनीति को....? बिलासपुर जिले की राजनीति में एक कालखंड बी आर यादव के पूर्व का है और दूसरा बीआर यादव की राजनीति से शुरू होता है। आज कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर जो भी नेता बैठे हैं वे कहीं ना कहीं बी आर यादव कैंप के छात्र रहे हैं ।कांग्रेस में अन्य नेता जैसे अशोक राव, राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, चित्रकांत जयसवाल ने अपने भारी भरकम गुट नहीं बनाएं और उन्होंने अपनी विधानसभा के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर राजनीति भी नहीं की बिलासपुर से इस बार कांग्रेस के हाईकमान ने जिस नए चेहरे को टिकट के लिए योग्य समझा वह किसी गुट का व्यक्ति नहीं था और मतदाता ने एक पढ़े-लिखे साफ-सुथरे चेहरे को पसंद करते हुए बड़े मतों के अंतर से जीता दिया। पराजित भाजपा नेता भले ही इस हार को पचा ले पर यह जीत कांग्रेस के उसी खेमे को नहीं पचती जिसे जनता ने एक नहीं कई बार नकारा है यहां तक की विधानसभा के चुनाव के ठीक बाद लोकसभा चुनाव में भी उसने मुख्यमंत्री के द्वारा चयनित कांग्रेस प्रत्याशी को नकार दिया और यह नकारना केवल बिलासपुर विधानसभा में नहीं हुआ बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर, मुंगेली, लोरमी तक हुआ। ऐसे में कांग्रेस का यह पूरा गुट जिसके पास संगठन के विभिन्न पद हैं निर्वाचित व्यक्ति को लक्षित कर कर अपने दाव चलते रहते हैं इस बार भी जमीन धंधे की एक अनिवार्य गलती जो एससी समुदाय के खिलाफ की गई उसे छुपाने के लिए शतरंज खेल ली गई। एससी मतदाताओं के भारी भरकम समर्थन से कांग्रेस की सरकार बनी है और इस समुदाय से पंगा लेना अल्पसंख्यकों के बस का नहीं है इसलिए मूल गलती को इस तरह छुपाया जा रहा है कि वह जनप्रिय विषय पर आ जाए और वह विषय है  सवर्ण विरुद्ध अल्पसंख्यक.....?