
मरवाही। 3 नवंबर मतदान के बाद अब 10 तारीख तक मरवाही क्षेत्र की सड़कों पर लाखों करोड़ों की गाड़ियां दिखाई नही देती। प्रवासी पक्षी के बारे में मरवाही के नागरिकों को पूर्व से पता था यही कारण है कि सामान्य से अधिक मतदान के बाद भी कोई राजनैतिक दल अपनी जीत को लेकर आश्वसत नहीं है। हालाकिं दावा दोनो कर रहे है। शोरगुल निकल जाने के बाद अब नागरिक मानते है कि चुनाव के मुद्दे ठीक नही थे, या यह कहे कि कांग्रेस ने जिन मुद्दों पर चुनाव संचालित किया वह मरवाही की नागरिकों के मुद्दे नही थे। कांग्रेस की विकास की परिभाषा में जिला और करोड़ो की घोषणा तो थी किन्तु स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना गायब था। जबकि मरवाही क्षेत्र की मूल आबादी जिसमें एसटी बहुसंख्यक है को अभी भी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक साल मलेरिया से मौत अभी भी होती है, और नवजात अभी भी मां के गर्भ में दम तोड़ते है। सुरक्षित प्रसव अभी भी सबको उपलब्ध नही है। बच्चों के साथ कुपोषण की समस्या से आदिवासी परिवार अभी भी जुझ रहे है। किन्तु इन विषयों पर बीएमडब्ल्यू, ओडी, मर्सडिज़ जैसी गाड़ियों में घुमने वाले नेताओं ने बोलना उचित नही समझा। उनके लिए चुनाव के मुद्दे कुछ और ही थे। मरवाही मतदान से वापस आकर कांग्रेस भाजपा दोनो के चुनाव प्रभारी जीत का दावा कर रहे है। हारजीत के अतिरिक्त 10 तारीख को यह भी तय होगा कि अपने लिए नया विधानसभा क्षेत्र खोज रहे अमित जोगी आने वाले समय में विपक्ष की राजनीति के लिए किस तरह उपयोगी होंगे। भाजपा के राज्य स्तरीय बड़े नेताओं डाॅ. रमन, धरम लाल कौशिक और अमर अग्रवाल के चुनावी बयानों से ऐसा लगता है कि क्षेत्र के राजनैतिक आंदोलनो में अमित जोगी खास चेहरा होंगे। भाजपा की एक खूबी यह भी है की वह सत्ता के खिलाफ आंरभिक विपक्षिय आंदोलन स्वयं प्रारंभ ना कर किसी और से कराती है। ऐसे में जेसीसीजे एक विकल्प हो सकती है। वैसे जानकार लोग बताते है कि मरवाही की हार जीत 10 से 15 हजार के बीच सिमटने वाली है।