
नई दिल्ली: मोदी सरकार ने अखबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, होर्डिंग इत्यादि के माध्यम से खुद के प्रचार के लिए पिछले वर्ष में 713.20 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. कार्यकर्ता जतिन देसाई द्वारा दायर एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विभाग ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 2019-20 के दौरान विज्ञापनों पर औसतन प्रति दिन 1.95 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. ब्यूरो ने बताया कि इसमें से 295.05 करोड़ रुपये प्रिंट, 317.05 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और 101.10 करोड़ रुपये आउटडोर विज्ञापन में खर्च किए गए हैं. हालांकि विभाग ये बताने में असमर्थ रहा कि सरकार ने विदेशी मीडिया में विज्ञापन देने में कितने रुपये खर्च किए हैं. जून, 2019 में मंबई स्थित आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली द्वारा दायर आवेदन के जवाब में मंत्रालय ने बताया था कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, आउटडोर मीडिया में विज्ञापन देने में 3,767.26 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. इससे एक साल पहले गलगली के एक अन्य आरटीआई आवेदन पर मंत्रालय ने मई, 2018 में बताया था कि मोदी सरकार ने जून 2014 से लेकर सरकारी विज्ञापनों पर 4,343.26 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. लोकसभा में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया था कि केंद्र सरकार ने साल 2014 से लेकर सात दिसंबर 2018 तक में सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार में कुल 5245.73 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है.