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24hnbc बगैर सक्षम पंजीयन के बीच शहर में संचालित है ऑक्यूपेशनल थेरेपी केंद्र
Tuesday, 07 Sep 2021 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । चिकित्सा क्षेत्र में मुख्यधारा के चिकित्सकों के अतिरिक्त ऐसी बहुत सी पद्धति है जो बीमारियों को ठीक करने में और मरीज को सामान्य जीवन में वापसी के लिए सहयोगी होते हैं। उन्हीं में से एक है फिजियोथैरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी छत्तीसगढ़ में लाखों परिवार सेरेब्रल पाल्सी, ऑटीझम, लर्निंग डिसएबीलिटी, बिहेवियर इशू, एडीएचडी जैसे मंद बुद्धि के अंतर्गत आने वाली बीमारियों से प्रभावित है और अपने बच्चों के शीघ्र सामान्य होने के लिए, विशेष थेरेपी के लिए ऐसे थेरेपी सेंटर पर जाते हैं, नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलैब के अतिरिक्त फिजियोथेरेपी या ऑक्यूपेशनल थेरेपी स्पीच थेरेपी केंद्रों को भी पंजीकृत होना अनिवार्य है। साथ ही इस क्षेत्र के विशेषज्ञ को मेडिकल काउंसिल में पंजीयन भी प्राप्त करना होता है किंतु यह नियम कठोरता से शहर के भीतर पालन नहीं किया जाता इस कारण शहर में ऐसे कई ऑक्यूपेशनल थेरेपी केंद्र है जो बगैर सक्षम पंजीयन के चल रहे हैं। ऐसा ही एक केंद्र मध्य नगरी चौक पर भी है। इस केंद्र पर जब हमने सेंटर के संचालक से संपर्क किया और उनके पंजीयन के बारे में जानकारी ली तो केंद्र संचालक ने बताया कि उन्हें केंद्र चलाते हुए लगभग 1 वर्ष हो गया है। और पूर्व मे वे 3 पाटनर थे जिसमें से 2 ने काम बंद कर दिया है और पंजीयन लंबित है। आप एक दिन बाद अर्थात बुधवार को लंच समय पर आकर पंजीयन देख ले। अतः दिए गए समय पर हम संस्थान पर पहुंचे प्रथम पक्ष में केंद्र संचालक फिजियोथैरेपी नहीं थे और बेल बजाने पर केंद्र संचालक की सहायिका ने दरवाजा खोला आने का कारण और मिलना किससे है की जानकारी लेने के बाद सहायिका वही रिसेप्शनिस्ट डेस्क पर बैठ गई और हमें संचालक का इंतजार करने कहा इस दौरान हमने महसूस किया कि सहायिका मोबाइल से शूटिंग कर रही है इतने में केंद्र संचालक भी आए हमने अपने आने का कारण बताया और पूर्व की जानकारी के मुताबिक पंजीयन दिखाने का निवेदन किया उन्होंने यहां वहां की बातें की चाय पीने का निवेदन किया और बार-बार एक ही इशारा किया कि अन्य बात कर लेते हैं और उनकी सहायिका मोबाइल से रिकॉर्डिंग करती रही। 
बिलासपुर शहर में स्वच्छ निष्पक्ष सूचना का प्रसारण लगातार कठिन होता जा रहा है इसके लिए कोई एक पक्ष जिम्मेदार नहीं है अभी दो-तीन दिन पूर्व ही इसी क्षेत्र में संचालित एक कैंटीन के भीतर गुपचुप रूप से चल रहे हुक्का बार की रिकॉर्डिंग का हल्ला हुआ किंतु किसी भी प्रसार माध्यम में खबर नहीं है। ऑक्यूपेशनल थेरेपी केंद्र का बगैर पंजीयन चलना वह भी ढाई साल से बीच शहर में अपने आप में गंभीर मामला है। केंद्र पर विशेषज्ञ की फीस ₹500 तथा थेरेपी की फीस ₹400 है। वह भी 45 मिनट के लिए सेरेब्रल पाल्सी, ऑटीझम, लर्निंग डिसएबीलिटी, बिहेवियर इशू, एडीएचडी जैसे रोग से ग्रसित बच्चों की रिकवरी होती भी है तो अत्यंत धीमी प्रक्रिया से ऐसे में संचालित केंद्र यदि पंजीयन भी नहीं कराते तो संबंधित पालक शिकायत होने पर, सेवा में कमी होने पर कहां शिकायत करें. ....? 
            बगैर पंजीयन के शहर में संचालित केंद्रों के संदर्भ में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय से संपर्क करने पर बताया गया कि यदि कोई केंद्र बगैर पंजीयन के संचालित है और सूचना प्राप्त होती है तो जांच और कार्यवाही की जाएगी साथ ही समय-समय पर निरीक्षण के लिए जांच दल भेजे जाते हैं।