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24hnbc शक्ति प्रदर्शन से नाखुश बताए जाते हैं हाईकमान
Friday, 27 Aug 2021 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। 27 अगस्त को जब शाम 7:40 पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सांसद राहुल गांधी के बंगले से बाहर निकले तब उनकी बॉडी लैंग्वेज वैसी नहीं थी जैसे मीडिया से बात करते समय उनके शब्द थे बैठक लगभग 3 घंटे से ज्यादा चली किंतु भूपेश बघेल ने मीडिया को सिर्फ 3 वाक्य बताएं आदरणीय राहुल जी ने हमारा निमंत्रण स्वीकार किया है वह शीघ्र ही यथा अगले हफ्ते छत्तीसगढ़ का दौरा करेंगे और मैं अभी भी मुख्यमंत्री हूं। पी एल पुनिया ने अलग से मीडिया से कोई बात नहीं की मुख्यमंत्री प्रदेश प्रभारी ने की जो बैठक सांसद राहुल गांधी के घर पर हुई उसमें उत्तर प्रदेश की महासचिव प्रियंका गांधी भी मौजूद थी, ऐसा बताया जाता है की पिछले 3 महीने से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री नंबर 1, नंबर दो मंत्री सभी दिल्ली जा रहे हैं और पिछले ढाई साल की सफलता की कहानी हाईकमान को बता कर आ रहे हैं। यह बात कोई नहीं बताता है कि हाईकमान को अलग अलग व्यक्ति सफलता की कहानी क्यों बताते हैं कल तो हद हो गई जब मुख्यमंत्री के साथ सफलता की कहानी बता दें निर्वाचित विधायक, महापौर यहां तक कि निगम मंडलों के नियुक्त अध्यक्ष भी अपने मुख्यमंत्री की सफलता की पैरवी करने पहुंचे एक नेता ने तो प्रभारी के पैर पकड़कर सफलता की कहानी बताएं कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ की सत्ता ने दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन किया उसे ऊपरी हलकों में शालीन तरीके से नहीं लिया गया आने वाले समय में छत्तीसगढ़ पर विशेष नजर रखी जाएगी इतना ही नहीं 3 घंटे की बैठक में आगे किस तरह सरकार चलेगी सबको साथ लेकर चलना क्यों जरूरी है और कांग्रेस के घोषणा पत्र को वास्तविक अर्थों में कैसे लागू किया जाए पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिया गए हैं । गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव का अधिकृत रूप से अब तक कोई बयान नहीं आया है छत्तीसगढ़ कांग्रेस में यदि सब विधायक मुख्यमंत्री के समर्थक हैं तो टी एस सिंहदेव के साथ कौन हैं यदि टी एस सिंहदेव के साथ कोई विधायक नहीं है तो हाईकमान उन्हें इतना वजन क्यों देता है और यदि मुख्यमंत्री का पक्ष इतना ही सत्य है तो उन्हें आनन-फानन में विधायक से लेकर महापौर तक को दिल्ली ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति अभी दिल्ली में शांत नहीं हुई।