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24hnbc उनका चेहरा भारतीय राजनीति में सादगी सौम्यता और नयापन सदा दिखाएगा
Thursday, 19 Aug 2021 18:00 pm
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समाचार -
बिलासपुर। आज देश अपने लाडले सपूत राजीव गांधी की 77 वी जयंती मना रहा है। राजीव गांधी का चेहरा भारतीय राजनीति में एक ताजगी लेकर आया था उन्होंने दो बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली पहली बार बेहद असहज संवेदनशील और गमगीन माहौल में जब श्रीमती इंदिरा गांधी कि उन्हीं के सुरक्षा सैनिकों द्वारा गोलीबारी में हत्या हुई के बाद और दोबारा मध्यावधि चुनाव के अभूतपूर्व चुनाव परिणामों के बाद वे हमेशा अपनी जिज्ञासा और नई सोच के लिए पसंद किए जाते थे। देश को दिल से समझने और संस्कृति को आत्मसात करने की क्षमता ने उन्हें पूरे भारत में जगह जगह घूमने प्रेरित किया इसी सिलसिले में वे छत्तीसगढ़ भी आए थे छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुलता वाले क्षेत्र में आना इसी बात का संकेत है कि वे आदिवासी संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करना चाहते थे। एक तरफ वह संचार क्रांति कंप्यूटर के साथ 21वीं सदी की बात कहते थे तो साथ में सुदूर जंगल में बसे नागरिकों के लिए दिल्ली का खजाना सीधे जोड़ना चाहते थे इसी का परिणाम था त्रिस्तरीय पंचायती राज जिसमें ग्राम पंचायत का नागरिक अपने लिए स्वयं योजना बनाएं और लागू करें उन्होंने राजनीति में जमीन से जुड़े नेताओं की पहचान भी खूब की उन्हीं में से एक नाम छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से नंद कुमार पटेल का था। सरपंच से भोपाल विधानसभा तक का सफर राजीव गांधी की पारखी की नजर का ही कमाल था आज जो विचारधारा राहुल गांधी को मजाक का विषय बनाती है और पप्पू पप्पू कहते नहीं थकती यही विचारधारा राजीव गांधी को भी हम देखेंगे हमें देखना है और उनके संचार और कंप्यूटर योजनाओं का खूब मखौल करती थी किंतु संचार को लपक कर अपने झूठ के लिए उपयोग भी इसी विचारधारा ने सबसे पहले किया और अभी भी कर रही है भारत में लोकतांत्रिक सुधार के दो बड़े उदाहरण पंचायती राज संशोधन दल बदल कानून और मतदान की आयु सीमा 21 से घटाकर अट्ठारह करना राजीव गांधी की बड़ी सोच का उदाहरण है वे जिस आतंकवाद का शिकार हुए वह आतंकवाद आज भी समाज में बांटकर अपना काम कर रहा है इतना ही नहीं पड़ोसी देशों में लोकतंत्र हित के लिए सीधे निर्णय लेने की जो त्वरित क्षमता उनमें थी वह कम प्रधानमंत्रियों में दिखाई देती है कुछ तो बाहरी देश अफगानिस्तान की संसद में 2015 में कुछ बोलते हैं और आज जब खुलकर बोलने का अवसर है तो चुप हो जाते हैं ऐसी आदत राजीव गांधी के सौम्य सरल और आत्मीयता से भरे चेहरे में नहीं थी हम सब की ओर से उन्हें शत शत नम।