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24hnbc पुनिया ने घोषणा की विवाद समाप्ति की असल राजनीति तो अब हुई है शुरू
Tuesday, 27 Jul 2021 00:00 am
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समाचार -
बिलासपुर। रामानुजगंज और सरगुजा पैलेस की लड़ाई कल समाप्त नहीं हुई असल में जहां समाप्ति दिख रही है लड़ाई वहीं से शुरु हो रही है। ढ़ाई- ढाई साल का यदि कोई फार्मूला था तो ढाई साल बाद टी एस सिंह देव ने बड़ी शालीनता के साथ उसे नहीं था कह कर समाप्त किया। लेकिन जो कप्तान की कुर्सी पर बैठता है उसे थोड़ा भी संदेह चैन से बैठने नहीं देता इस बात को कोई नहीं मानेगा कि राज्य की राजनीति की बड़ी शख्सियत के खिलाफ एक नहीं सत्ता पक्ष के 18 विधायक कहीं बैठकर हत्या का षड्यंत्र जैसा गंभीर आरोप लगाने वाले हैं और उन्हें पता ना हो या उनकी जानकारी के बगैर ऐसा आरोप लग जाए कहने वाले तो यहां तक दावा करते हैं कि पिछले 15 दिनों में छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेता विधानसभा अध्यक्ष गृहमंत्री पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दो ब्राह्मण नेता जो विधायक भी हैं दिल्ली तक यात्रा कर चुके हैं और सब ने सत्ता के 2 साल की उपलब्धियां हाईकमान को बताई हो यात्रा इतनी सीधी नहीं रही होगी इन सब का परिणाम ही था कि जिसने भी रची टी एस बाबा को परेशानी में डालने वाली यह नीति उचित नहीं थी, लोगों को बाहर से ऐसा लगता है कि कांग्रेस के नेता अपनी ही टीम में गोल मार रहे हैं किंतु यह आधी कहानी है पूरी कहानी छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से ही प्रारंभ होती है । मध्य प्रदेश से कटकर छत्तीसगढ़ बना आदिवासियों के हित के नाम पर किंतु देखा जाए तो 2003 के बाद से छत्तीसगढ़ में राजनीति के ध्रुव दो हैं ओबीसी वर्सेस सामान्य इनमें से हटकर दो और बिंदु हैं एक मारवाड़ी और दूसरा ट्राइबल मारवाड़ी लाॅबी पूरे राज्य में इतनी मजबूत है कि लड़े कोई आर्थिक संसाधन और शोषण का पूरा खेल मारवाड़ी लाॅबी के पास है अब ओबीसी और सवर्णों के बीच देखें सत्ता में चाहे कांग्रेस हो या भाजपा ओबीसी में कुर्मी, साहू और यादव ने लगातार अपने पास सत्ता बाहुबल और धनबल एकत्र किया है।
धीरे-धीरे राजनीति के मैदान से ठाकुर, ब्राह्मण को किनारे लगाया है एक बार फिर ढाई साल के सीगुफे के बाद ऐसा लगा कि कांग्रेस की सरकार में स्वर्ण को कुछ मिलेगा तब जो ओछी राजनीति हुई उससे लगता है कि ट्राइबल केवल दूसरे के हाथ की कठपुतली बनने को तैयार हैं। बस्तर में नक्सली मोर्चा हो या मैदानी राजनीति उपयोग करने वाले बड़ी शालीनता कुटीलता से ट्राइबल का उपयोग करते हैं और अपना काम निकालते हैं फिर चाहे राजनीति का मैदान हो या कोई और स्थान इस बार भी रामानुजगंज के विधायक का उपयोग हुआ सत्ता में उनकी सीधी भागीदारी भी नहीं है विधायक बनने के बाद मंत्री का पद भी नहीं मिला है हो सकता है कि इसी लालच में उन्होंने पैलेस के खिलाफ बोलने का हौसला दिया। विधानसभा सत्र के ठीक पहले प्रदेश प्रभारी का आना और उस यात्रा के पूर्व छत्तीसगढ़ के बड़े कांग्रेसी नेताओं का दिल्ली जाना और बाद में पुनिया जी की यात्रा के दौरान ही बृहस्पति सिंह का टी एस बाबा पर ये आरोप से लगता है कि पटकथा हर एपिसोड के बाद तुरंत तुरंत लिखी जा रही है। पुनिया जी जहां पर ओपेरा समाप्त बता रहे हैं असल में अब राजनीति, कूटनीति, वार, प्रतिघात अब शुरू होगा।