
18 सितंबर से 16
अक्टूबर तक चले पुरषोत्तम मास में श्रीराम नाम लेखन का पुण्यकार्य हुआ, उसके समापन पर प्राप्त हुई पुस्तिकाओं का विधि विधान से क्रमशः बिलासपुर गिरिजवन रतनपुर पकरिया धाम स्थित दुःखभंजन श्री हनुमानजी महाराज के मंदिर में पूजन करके अमरकंटक में मां नर्मदे के पावन जल में विसर्जित किया गया।
इस पुण्यकर्म में राम नाम लिखने वाले सभी को भगवान श्रीराम की अनन्य भक्ति प्राप्त हो ऐसी प्रार्थना हैं की।