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24HNBC हिंसा समर्पण नीति और सुरक्षा बलो की कार्यवाही अब तो सब पर लगा है प्रश्न चिन्ह
Thursday, 08 Apr 2021 18:00 pm
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24HNBC वर्ष 2013  झीरम घाटी हमले के बाद छ ग विधान सभा में एक क्लोज डोर सत्र हुआ आज तारीख तक कोई नेता यह नहीं पूछता की बंद दरवाजे के पीछे मंत्री मुख्यमंत्री नेताप्रतिपक्ष विधायक किसने क्या कहा बंद कमरे की चर्चा के बाद माओवादी हिंसा ग्रस्त  क्षेत्र में क्या बदलाव आया है बी जे पी को अब  बताना ही  चाहिए की आखिर उस दिन बात क्या हुई थी 
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियानों और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यो को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने और प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को गति प्रदान करने हेतु चलाए जा रहे आभियान को तेज़ करने का फैसला लिया है। बैठक में नक्सलवाद या वामपंथी अतिवाद प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक वर्ष 2009-13 के बीच नक्सली हिंसा के 8782 मामले सामने आए, जबकि वर्ष 2014-18 के बीच नक्सली वारदातों की संख्या घटकर 4,969 रह गई।समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री ने वामपंथी अतिवाद (Left Wing Extremism-LWE) को राष्ट्र के सम्मुख सबसे बड़ी चुनौती बताया। हालाँकि आँकड़ों के अनुसार, विगत लगभग एक दशक में वामपंथी अतिवाद से संबंधी हिंसक घटनाओं में काफी कमी आई है। जहाँ एक ओर वर्ष 2009 में इस प्रकार की 2258 घटनाएँ दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर वर्ष 2018 में 833 घटनाएँ दर्ज की गई।भारत में नक्सली हिंसा की शुरुआत वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग ज़िले के नक्सलबाड़ी नामक गाँव से हुई और इसीलिये इस उग्रपंथी आंदोलन को ‘नक्सलवाद’ के नाम से जाना जाता है। ज़मींदारों द्वारा छोटे किसानों के उत्पीड़न पर अंकुश लगाने के लिये सत्ता के खिलाफ चारू मजूमदार, कानू सान्याल और कन्हाई चटर्जी द्वारा शुरू किये गए इस सशस्त्र आंदोलन को नक्सलवाद का नाम दिया गया। यह आंदोलन चीन के कम्युनिस्ट नेता माओ त्से तुंग की नीतियों का अनुगामी था (इसीलिये इसे माओवाद भी कहा जाता है) और आंदोलनकारियों का मानना था कि भारतीय मज़दूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियाँ ज़िम्मेदार हैं।