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समाज कल्याण में अपना कल्याण कागजी संस्थाओं को मिलता है अनुदान
Saturday, 27 Mar 2021 00:00 am
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बिलासपुर 24 HNBC. 

बिलासपुर। समाज कल्याण विभाग में विभागीय भाई भतीजावाद इस तरह हावी है कि कागज पर चल रही संस्था को ना केवल विभागीय मान्यता प्राप्त हो जाती है साथ ही अनुदान भी मिल जाता है। दूसरी ओर ऐसी संस्था जो वास्तव में खोली जाती है उसे जानबूझकर विभाग के दलाल नुमा कर्मचारी लेटलतीफी में फसाकर विभागीय मान्यता से वंचित रखते हैं और इतना डिले करते हैं कि नियमों को समझते हुए संस्था स्वयं ही बंद हो जाए। यह खेल बिलासपुर, पेंड्रा गौरला मे जम कर हुआ है। एक शिकायत तो ऐसी भी है जिसमें कलेक्टर ने विशेष रूचि लेकर संस्था को आकस्मिक निधि से 23 लाख रुपए दिलाएं जबकि संस्थाओं को विभागीय मान्यता भी प्राप्त नहीं थी । वर्तमान में यह संस्था नाम मात्र के लिए चल रही है और इसके हितग्राही वृद्ध हैं बाहरी दानदाताओं के खाने पर निर्भर है । समाज कल्याण विभाग में पूरा खेल इसी विभाग का एक संविदा कर्मचारी करता है उसका दावा है कि संचनालय से लेकर सचिवालय तक के अधिकारी उसकी मुट्ठी में है बताते हैं कि उक्त संविदा कर्मचारी ने भी अपने पिठुओं के मार्फत एक युवा समिति बनवाई और उसे गौरेला पेंड्रा जिले में कागजों पर संचालित कर दिया इस जिले में उस वर्ग विशेष के हितग्राही हैं ही नहीं जिन की सेवा के लिए यह संस्था शुरू हुई विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इस कागजी संस्था का कोषाअध्यक्ष एक अन्य अनुदान प्राप्त एनजीओ में बतौर प्रबंधक नौकरी कर रहा था और गौरेला पेंड्रा में यह संस्था चल रही थी। इसी बीच संविदा कर्मचारी का तबादला संचनालय से बीआरसी हो गया। हाल ही में विभागीय अनुदान जारी हुए हैं और विभाग में दलालों की सक्रियता खूब देखी गई दावा करने वाले तो यहां तक बताते हैं कि इस विभाग में बिना दलाली के तो विद्या नगर के एक एनजीओ का अनुदान भी स्वीकृत नहीं हुआ था जबकि उक्त एनजीओ का बिलासपुर हेड कांग्रेस का बड़ा नेता है और जब परिवार का एक सदस्य कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा नाम है समाज कल्याण अधिकारी कर्मचारी अपने कल्याण पर ज्यादा ध्यान देते हैं और समाज के जरूरतमंद लोगों के कल्याण पर ना के बराबर। 
          गौरतलब है कि इस विभाग की कमान ऐसे अधिकारियों के पास है जिसका कहीं ना कहीं संबंध बिलासपुर जिले से हैं।