
जशपुरनगर 24HNBC
नसबंदी शिविर में हितग्राही महिलाओं को 12 घंटे से अधिक समय तक भूखे रख कर,रात को शिविर रद्द किए जाने की घटना पर संसदीय सचिव यूडी मिंज ने नाराजगी जताई है। उन्होनें कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग जिम्मेदार है। उन्होनें कहा कि जिस कोरोनाकाल और शारीरिक दूरी की दुहाई देते हुए महिलाओं,उनके स्वजन और मितानिनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की गई है,उसके लिए सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी बनती है। अगर कोरोना का खतरा था तो महिलाओं को सौ किलोमीटर दूर से बुलाने की जरूरत ही नहीं थी।संसदीय सचिव ने कहा कि शिविर की असफलता की सीधी जिम्मेदारी सीएमएचओ की बनती है। जिस प्रकार शिविर में अव्यवस्था की बात सामने आ रही है उससे स्पष्ट है कि नसबंदी जैसे संवेदनशील मामले को लेकर सीएमएचओ गंभीर नहीं थे और ना ही शिविर के आयोजन और इसकी व्यवस्था पर उनकी नजर थी। इसलिए इस पूरी प्रकरण में सबसे पहले सीएमएचओ और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों के विरूद्व कार्रवाई होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सोमवार 22 मार्च को स्वास्थ्य विभाग ने जिले के पत्थलगांव तहसील की 50 महिलाओं को नसबंदी आपरेशन के लिए मितानिनों के माध्यम से जशपुर बुलाया था। अपने छोट बच्चे और स्वजनों के साथ नसबंदी के लिए इस दिन सुबह 6 बजे ही महिलाएं जशपुर पहुंच गई थी। जिला चिकित्सालय में कोरोना और प्रेग्नेंसी टेस्ट के बाद सर्जन डा उषा लकड़ा के आने पर नसबंदी करने के लिए बैठा दिया। रात 8 बजे तक चिकित्सक शिविर में नहीं पहुंची तो महिलाएं व उनके स्वजन,सीएमएचओ डा पी सुथार के पास पहुंचीं। यहां वस्तु स्थिति की जानकारी लेने के बाद चिकित्सक की अनुपस्थिति की जानकारी देते हुए सीएमएचओ ने महिलाओं को वापस जाने की सलाह दी थी। इससे नाराज महिलाएं उनके स्वजन और साथ में आई मितानिन कलेक्टर बंगले के सामने पहुंच कर बैठ गई थी। ये किराए के वाहन का खर्चे की मांग कर रहीं थी। मौके परपहुंचे तहसीलदार लक्ष्मण राठिया,सीएमएचओ डा पी सुथार और कोतवाली प्रभारी एलएस धुर्वे ने समझाइश देकर इन महिलाओं को वापस भेजा था। इस बवाल के बाद चिकित्सा विभाग ने महिलाओं का नसबंदी आपरेशन किया था। लेकिन इस बवाल के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से नसबंदी कराने वाली तीन महिलाएं अस्पताल से निकल कर पैदल बस स्टैंड पहुंच गई थी। यहां प्रतीक्षालय तक पहुंचते पहुंचते उनकी तबियत बिगड़ गई थी। इस घटना से भी विभाग की खासी फजीहत हुई थी। इस पूरे मामले को लेकर बुधवार को उस वक्त बड़ा बवाल शुरू हुआ जब जशपुर के तहसीलदार लक्ष्मण राठिया की रिपोर्ट पर कोतवाली पुलिस ने हितग्राही महिला,उनके स्वजन और स्वास्थ्य विभाग की मितानिन सहित 12 लोगों के खिलाफ महामारी अधिनियम की धारा 188,269,270 और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था।