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इको क्लब खनिज न्यास की राशि का मनमाना उपयोग
Thursday, 25 Mar 2021 18:00 pm
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पत्थलगांव 24HNBC 

प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में मिलने वाली ईको क्लब की राशि में गड़बड़ी का मामला एक बार फिर सामने आया है। खनिज न्यास निधि और खेलगढ़िया का मामला पुराना पड़ने के बाद अब इस मद की राशि शिक्षा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के निशाने पर है। इस बार इस राशि का उपयोग स्कूलों में मास्क और सेनिटाइजर उपलब्ध कराने में किया जा रहा है। सत्र की समाप्ति के समय यह खरीद किसके लिए है इसे लेकर शिक्षा विभाग खुद ही स्पष्ट नहीं है वहीं इसके लिए रायपुर की एक फर्म का बिना जीएसटी वाला बिल थमाया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद विभाग के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों के कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है।उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग पर किसी न किसी राशि की बंदरबांट के आरोप गत वर्षों में लगते रहे हैं। खनिज न्यास निधि से माडल स्कूलों का निर्माण करने के नाम पर करोड़ों रूपये की राशि का अपव्यय करने का मामला पिछले वर्षों में सुर्खियों में छाया रहा। इसके साथ ही खेलगढ़िया और ईको क्लब की राशि में बंदरबांट के आरोपों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। हालांकि गत वर्ष कोरोना के चलते लाकडाउन के कारण स्कूलों में गतिविधियां सीमित रहने से ऐसे मामले सामने नहीं आ पाए। परंतु वित्तीय वर्ष समाप्त होने के करीब आने के साथ ही ईको क्लब में गड़बड़ी का मामला एक बार फिर सामने आया है। 'नईदुनिया' से चर्चा में कुछ स्कूलों के अध्यापकों ने इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि शिक्षण सत्र 2020-21 के लिए यह राशि सीधे स्कूलों के खाते में स्थानांतरित की गई है। इस राशि से स्कूलों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उपायों के साथ ही इस संबंध में लोगों को जागरूक बनाने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करना है। परंतु इस राशि से स्कूलों में मास्क और सेनिटाइजर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में सीधे विभाग की ओर से मास्क,सेनिटाइजर और अन्य सामग्रियां पहुंचाई जा रही है और उन्हें इसका बिल थमाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिल रायपुर की किसी फर्म विकास शर्मा के नाम से बना हुआ है। कईप्रधानपाठकों ने बताया कि शैक्षिक समन्वयकों के माध्यम से उन्हें यह राशि स्कूलों के खाते से निकालकर बिल का भुगतान करने का दबाव डाला जा रहा है। स्कूलों का कहना है कि पिछला सत्र पूरा लाकडाउन के हवाले रहा। अभी भी सरकार द्वारा जनरल प्रमोशन देते हुए स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद ग्रीष्मावकाश प्रारंभ हो जाएगा जो माह जून तक जारी रहेगा। ऐसे में यह मास्क और सेनिटाइजर आखिर किसके काम आएंगे। उनका कहना है कि आगामी सत्र में कोरोना की स्थिति क्या रहेगी इस बारे में अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में इन्हें आगामी सत्र की तैयारी मानकर भी रखा नहीं जा सकता है। यह मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है। विकासखंड शिक्षाधिकारी ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है। उन्होंने इस राशि का इस्तेमाल पर्यावरण सुरक्षा के उपाय करने पर किए जाने की बात तो कही परंतु इस राशि का मास्क और सेनिटाइजर की खरीद के लिए उपयोग किए जाने को लेकर अनभिज्ञता जताई। जबकि नई दुनिया के पास इस बात को लेकर पुख्ता जानकारी मौजूद है। जिसके मुताबिक प्राथमिक स्कूलों को 5500 रुपये का बिल थमाया गया है जबकि माध्यमिक स्कूलों को 7 से 7500 रुपये बिल दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि एक विकासखंड में सैकड़ों प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल हैं ऐसे में ईको क्लब में हो रही इस गड़बड़ी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।नहीं हो रहा क्रय नियमों का पालनस्कूलों में शाला विकास समिति का गठन किया जाता है जो स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों के साथ ही स्कूल के द्वारा की जाने वाली सामग्री खरीद पर नजर रखती है। कोई भी खरीद होने से पहले शिक्षा समिति के द्वारा प्रस्ताव पारित किया जाता है और सामग्री कोटेशन लेने के बाद किसी विधिवत् पंजीकृत दुकान से ही खरीदे जाने के प्रावधान हैं ताकि किसी भी प्रकार से भ्रष्टाचार को रोका जा सके। परंतु ईको क्लब की राशि की खरीद के लिए इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। स्कूलों को भेजे जा रहे बिल की एक प्रति भी 'नईदुनिया' के हाथ लगी है। बताया जाता है कि सभी स्कूलों इसी सप्लायर का बिल दिया गया है इस बिल में जीएसटी नंबर तक नहीं है। इससे राशि की बंदरबांट के आरोपों को और बल मिल रहा है।बिल में दर्शाए गए महंगे दाममामले को लेकर नईदुनिया की पड़ताल में स्कूलों को बांटी गई सामग्री के दाम भी अधिक लगाए जाने की बात सामने आई है। सबसे अधिक बंदरबांट मास्क के दामों में दिखाई गई है। जानकारी के अनुसार स्कूलों में 150 मेडिकेटेड मास्क सप्लाई किए गए हैं जिनकी दर 10 रुपये लगाई गई है। जबकि बाजार में अच्छी कंपनी के मेडिकेटेड मास्क भी 5 रुपये की दर पर उपलब्ध हैं। थोक में खरीदी पर इनकी कीमत 2 से 3 रुपये पड़ती है। वहीं कुछ निम्न स्तरीय मास्क मात्र 1.5 प्रति मास्क की दर पर उपलब्ध हैं। ऐसे में 10 रुपये की दर समझ से परे है। वहीं 5 लीटर का सेनिटाइजर 400 से 500 रुपये की दर पर उपलब्ध है जबकि स्कूलों में सप्लाई किए गए सेनिटाइजर की कीमत 600 रुपये लगाई गई है।