
बिलासपुर 24 hnbc.
नियम के अनुसार चलें तो कोई अधिवक्ता अपने काम का विज्ञापन करके प्रचार प्रसार नहीं कर सकता यह बार काउंसिल कहती है। राजस्व विभाग के काम दिन प्रतिदिन कठिन होते जा रहे हैं राजस्व विभाग के नियम से चलें तो तहसील में जो काम होते हैं वह कराने के लिए किसी अधिवक्ता की जरूरत ही नहीं है आवेदक को स्वयं उपस्थित होना होता है। किंतु तहसील परिसर में दलालों का इतना बोल बाला है कि अधिवक्ता भी अब दलालों के सामने टिक नहीं पाते । दलाल विज्ञापन करके भी काम मांगने निकल पड़ते हैं शहर की नई बनी कालोनियों में इस आशय के पोस्टर चिपके नजर आते हैं की नामांतरण, डायवर्सन , कब्जा, फौजी दुरुस्ती करण जैसे काम कराने के लिए संपर्क करें यहां तक कि कुछ दलाल तो रिकॉर्ड दुरुस्ती के नाम पर अवैध तरीके से चढ़े नाम विलोपित करने का दावा भी करते हैं। कुछ वर्ष पहले तहसील ऑफिस के बाहर इस आशय की सूचना चिपकी दिखाई देती थी कि जिस किसी को मिसल, अधिकार अभिलेख और खसरे का नक्शा प्राप्त करना हो तो निम्न नंबर पर संपर्क करें यह सूचना पूरी तरीके से गैरकानूनी थी क्योंकि राजस्व के नक्शे जिला प्रशासन की मिल्कियत होते हैं । और उसी के अभिलेखागार में उनको प्राप्त होना चाहिए अन्य स्थानों पर रखे गए नक्शे वैद्य नहीं है किंतु यहां पटवारियों के ऑफिस में बैठे निजी स्टाफ ने गोपनीय दस्तावेज की फोटो प्रति करा कर इन्हें बेचना शुरू कर दिया ऐसे कई निस्तार पत्रक है जो रिकॉर्ड रूम में तो मौजूद नहीं है लेकिन दलालों के पास उपलब्ध है। ऐसे में जब कभी भी किसी प्रकरण में अधिकार अभिलेख 54,55 मिसल, निस्तार पत्र जैसे दस्तावेज जमा करने की बारी आती है दलालों का रेट 4 गुना हो जाता है क्योंकि अभिलेखागार में रिकॉर्ड मौजूद नहीं है और दलालों के घर पर रखा हुआ है तभी तो नामांतरण से लेकर कब्जा दिलाने का काम दलाल खूब करते हैं और अब तो कालोनियों में घूम-घूम कर कागज लगाकर काम मांग रहे हैं।तहसील परिसर में कुछ सरकारी कार्यालय के अंदर बैठा हुआ व्यक्ति भी सरकारी नौकर नहीं है और आने वाला यह जानता ही नहीं कि तहसीलदार के दफ्तर में जो रीडर की सीट पर बैठा है वह असल में बाहरी आदमी है किंतु व्यवस्था है कि इसे नजरअंदाज कर कर चलती है। तहसील दफ्तर में एक ज्ञापन बनाने का 500 से 1000 रुपये लग जाते हैं अन्यथा आम सूचना प्रकाशन का ज्ञापन के नाम पर महीनों के लटकता रहता है।