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निजी बड़े स्कूल सूचना को बताते कम छुपाते ज्यादा

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बैंक और स्कूल की तुलना आप पारदर्शिता के मामले में करें पढ़ने वाले कहेंगे यह क्या बात हुई लेकिन मामले में सच्चाई है दोनों स्थानों पर हम अपना भविष्य बनाते हैं, सुरक्षित करते हैं। स्कूल में घर के बच्चों को भेजते हैं एक बड़ी धनराशि खर्च करते हैं इसलिए कि उनका भविष्य बने वे आने वाले समय के लिए तैयार हो दूसरी तरफ हम बैंक का रुख करते हैं वहां खाता खोलते हैं उसमें पैसे जमा करते हैं ताकि हमारा हमारे परिवार का भविष्य सुरक्षित रहे। हम सब कभी ना कभी बैंक जाते हैं बैंक शाखा के अंदर वो सब जानकारी जो हम जानना चाहते हैं सहज ही मिल जाती है भले ही हमारा खाता बचत खाता हो चालू खाता हो या किसी अन्य श्रेणी का बैंक सूचना देने के पूर्व यह नहीं जानना चाहता कि आप के बचत खाते में कितना पैसा है, उसने सूचनाओं को पटल पर ही लिख दिया है आईएफसी कोड ब्रांच कोड ब्रांच शाखा प्रबंधक का नंबर, नाम, क्षेत्रीय कार्यालय का नंबर ईमेल, आईडी यहां तक कि लोक बैंकिंग लोकपाल का पता और ईमेल आईडी भी आप जब चाहे संबंधित स्थानों से अपनी शिकायत कर सकते हैं शिकायत का प्लेटफार्म स्टेप बाय स्टेप बढ़ाया जा सकता है अब चले स्कूल की ओर यहां भी हम हर महीने एक मोटी रकम अपने बच्चे के भविष्य बनाने में खर्च करते हैं किंतु यहां निजी स्कूलों में सूचनाओं का बेहद अभाव है सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूल इस मामले में बहुत ही खराब स्थिति में हैं स्कूलों ने अपने मान्यता का कोड या पंजीयन क्रमांक प्रदर्शित नहीं किया है वह यह भी नहीं बताते की छत्तीसगढ़ सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय से संबद्ध है इतना ही नहीं स्कूल की फेकल्टी भी नहीं बताई जाती आखिर पालक का हक है कि वह जाने कि जिस स्कूल को वह हर माह हजार की रकम दे रहा है वहां उसके बच्चे को किस योग्यता का शिक्षक पढ़ाता है किंतु ऐसा नहीं है एक पालक की हैसियत स्कूल प्रबंधन के सामने बहुत ही दयनीय होती है हम निजी क्षेत्र के स्वनामधन्य बड़े स्कूलों के बारे में उनके दावों के बारे में एक-एक करके चर्चा करेंगे क्योंकि यह हमारा सामाजिक उत्तरदायित्व है।