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जमीन पर कब्जा गुजर बसर के लिए नहीं धंधे के लिए हो रहा है, चिल्हाटी में नए तरीके से सक्रिय है भूमाफिया

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर, 12 सितंबर 2022। जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत मस्तूरी का प्रमुख ग्राम चिल्हाटी इन दिनों जमीन पर कब्जे की समस्या को लेकर और सुविधाओं से गिर गया है। 2005 तक इस गांव में जो लोग जमीन पर कब्जा करते थे वे लोग गुजर बसर के लिए ऐसा करते थे तब 3-4 डिसमिल से ज्यादा जमीन पर कब्जा नहीं होता था पर 2009 के बाद यह तरीके बदल गए लोगों ने अपनी जरूरत से अधिक जमीन पर ना केवल कब्जा किया बल्कि भ्रष्टाचार के तौर तरीके अपनाकर कागज बनवाना भी शुरू किया। जिला मुख्यालय से ज्यादा दूर ना होने के कारण इन जमीनों को बेचा जाने लगा गांव की बहुसंख्यक आबादी यादव है और इन्होंने अपने राजनीतिक प्रभुत्व का इस्तेमाल कर कर जमीनों पर कब्जा शुरू किया। बेजा कब्जा को लेकर अब गांव में शिकायतों का दौर प्रारंभ हो गया। गांव वालों का कहना है कि सरपंच सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है अतः जांच हो और सरपंच को पद से बेदखल कर दिया जाए, वहीं सरपंच का अपना पक्ष है वह कहते हैं कि जांच किसी एक व्यक्ति की क्यों हो गांव के अंदर उपलब्ध समस्त सरकारी जमीन, आबादी जमीन, मरघट की जमीन, घास भूमि, छोटे झाड़ी का जंगल, निस्तार पत्रक की जमीन सभी की जांच होना चाहिए और उन्होंने एक सूची भी जारी की जिसमें 30 से 40 लोगों का नाम दिखाई देता है जिस पर बेजा कब्जा के आरोप हैं। जमीनों पर बेजा कब्जा और कब्जे के उपरांत उसे बेच देना अब चिल्हाटी गांव का सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ रहा है। गांव के शांतिप्रिय लोगों को तो अब यह डर लगने लगा है कि जमीन पर बेजा कब्जा किसी दिन में गांव में गूटीय हिंसा ना करा दे।