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निस्तेज पदाधिकारियों के शहर में कांग्रेस का सम्मेलन, कौन पार लगाएगा बेड़ा

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समाचार -
बिलासपुर, 6 जून 2023। 2018 के चुनाव परिणाम मे जिस तरह से पूरे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को जीत प्राप्त हुई थी इससे उलट स्थिति बिलासपुर संभाग में थी शेष कर बिलासपुर जिले में, भारतीय जनता पार्टी और जेसीसी अजीत जोगी ने कांग्रेस को बहुत नुकसान किया ऐसे में कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता विधानसभा चुनाव के पूर्व से ही बिलासपुर को केंद्र बिंदु बनाकर इस बार के चुनाव में उतरने की मानसिकता रखते हैं यही कारण है कि अभी एक माह पूर्व ही बिलासपुर में कांग्रेस का पदाधिकारी सम्मेलन हुआ और अब संभागीय कार्यकर्ता सम्मेलन होने जा रहा है जिसमें पहली बार प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा शामिल होने वाली है। यहीं से कुछ प्रश्न भी उठते हैं। कार्यकर्ता सम्मेलन करने के पूर्व क्या कांग्रेस ने अपने पूर्व सम्मेलनों का पालन प्रतिवेदन देखा है यदि वह देखेंगे तो उन्हें पता चलेगा की पालन प्रतिवेदन पर वह 10% भी खरे नहीं उतरते। बिलासपुर जिले का संगठन चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण भूपेश सरकार की सफल योजनाओं को जनता के बीच ले जाकर उस तरह से प्रसारित, प्रचारित नहीं करता जैसा उसे हाईकमान से निर्देशित होता है। बिलासपुर संगठन के नेतृत्व की सबसे बड़ी असफलता तो पार्टी के सत्ता में रहते हुए पार्टी भवन के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया पूरी नहीं करा पाना है। भवन का शिलान्यास तो दूर की बात है ऐसे में अपनी ही सरकार की जनउमुखी योजनाओं को सफल बताने के लिए पार्टी पदाधिकारियों का आत्म बल कैसे ऊंचा रह सकता है। शायद यही कारण है कि पार्टी का ग्रामीण संगठन शहर संगठन के पदाधिकारी नगर सरकार ग्रामीण सरकार स्वयं की होते हुए भी मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं तभी तो संभागीय सम्मेलन के पूर्व एक साधारण पत्रकार वार्ता भी ना करा सके। क्या आबकारी कोयला घोटालों के आरोपों के बाद पार्टी का संगठन पत्रकारों से दूरी रखने लगा है। इतना ही नहीं कल तक जो मंत्री मीडिया के सामने बड़ी-बड़ी बातें करते थे अब बिना बात किए निकलते नजर आते हैं। 
बिलासपुर में कांग्रेस पार्टी का संगठन सत्ता होते हुए प्रभावशील नहीं प्रभावहीन नजर आता है, ऐसे में पार्टी के बड़े नेताओं की जिम्मेदारी अपनी सीट जीतने के साथ अपने प्रभाव क्षेत्र की सीट पर भी बढ़ गई है।