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हाई कोर्ट जज नान घोटाले के आरोपियों की कर रहा था मदद, एससी में हुई लंबी बस अब मामला 26 को ....

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समाचार  :-
बिलासपुर, 20 सितंबर 2022। 19 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की तीन सदस्यीय बेंच ने ईडी द्वारा दायक उस याचिका की सुनवाई की जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला मामले में जांच स्थानांतरित करने की मांग की गई है। यह घोटाला छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के सरकार के समय का है। ईडी ने कहा है कि हाई कोर्ट का एक जज आरोपियों को मदद पहुंचा रहा था। पीट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे जिस सामग्री पर भरोसा करना चाहते हैं उसे सीलबंद लिफाफे में दें। अब यह पिटीशन 26 सेप्टेंबर 3:00 बजे सुनी जाएगी। भारत के सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला इतना बड़ा है कि सुप्रीम कोर्ट संविधान अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में संवैधानिक पदों पर अधिकारियों की मिलीभगत से उच्च पदस्थ अधिकारी अपने पदों का फायदा उठा रहे हैं। प्रतिवादियों की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी, सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उक्त घोटाला छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के शासन के दौरान हुआ। एसजी मेहता ने कहा कि यह सामने आया है कि छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी याचिकाकर्ताओं के मामले को कमजोर करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं और अभियुक्तों ने न केवल गवाहों को ईडी के समक्ष अपना बयान वापस लेने के लिए प्रभावित किया बल्कि एसआईटी ने भी कार्रवाई को रोकने के 7 प्रयास किए। उन्होंने प्रस्तुत किया कि ईडी की जांच से पता चला है कि आरोपी संवैधानिक के पदाधिकारियों के संपर्क में था और अन्य सहआरोपियों के अपराधों की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों को वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार से मदद मिली थी इस पर सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उन्होंने मेरे मामले पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए इसे पड़ा है लेकिन उन्होंने सामग्री दायर नहीं की है या तो आप सामग्री का खुलासा करें या इसे न पड़े। एसजी मेहता ने प्रस्तुत किया कि जबकि उन्हें सामग्री को रिकॉर्ड पर रखने में कोई संकोच नहीं है उक्त सामग्री का खुलासा करने से सिस्टम में लोगों का विश्वास ही ले जाएगा। उन्होंने कहा अगर यह सार्वजनिक डोमिन में आता है तो यह सिस्टम में लोगों के विश्वास को हिला सकता है। हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश संवैधानिक अधिकारियों के संपर्क में थे जो आरोपी को मदद कर रहे थे क्या आप चाहते हैं कि इसे मैं सार्वजनिक कर दूं तदानुसार एसजी ने पीट से कहा कि वह कुछ समय ले और सामग्री को आराम से देखें और फिर निर्णय दें । एक आरोपी की ओर से सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा उक्त आरोपी को 2015 में गिरफ्तार किया गया था इस मामले में 170 से अधिक गवाहों से पूछताछ की गई जिसमें अंतिम गवाह भी शामिल है जो जांच अधिकारी था। इधर एसजी ने कहा कि कोई भी आरोपी जेल में नहीं है और वह जमानत पर हैं उन्होंने यह भी कहा कि रजिस्ट्री में उल्लेखित करने के बावजूद मामला सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है मैंने 6 बार उल्लेख किया मैंने कहा मेरी याचिका लंबित है कृपया मामले को समाप्त ना करें चीफ जस्टिस ने कहा जस्टिस रस्तोगी बिना साथी के थे इसीलिए वह यहां हमारे साथ बैठे हैं लेकिन जब हमने मामले की सुनवाई शुरू की है हम इसे उसी संयोजन में समाप्त करेंगे जो भी दस्तावेज सील बंद लिफाफे में है हमने उन्हें नहीं देखा है लेकिन एसजी ने अनुरोध किया है कि हम उन पर एक नजर डालें यदि हम पाते हैं की सामग्री को सार्वजनिक किया जाना है तो हम उसकी अनुमति देंगे एक अनुरोध किया गया है कि जांच को स्थानांतरित किया जाए और इस अदालत में नवंबर 2021 में नोटिस जारी किया था लगभग 10 महीने बीत चुके हैं मुकदमे के समाप्त होने के पहले हमें यह तय करना होगा कि दूसरे पक्ष में सार है मामले को अगले सोमवार 3:00 बजे सूचीबद्ध करें तभी तक हम वह नोटिस कह रहे हैं 2021 में जारी किया गया था जिसका अर्थ है कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ पाया गया है इस प्रकार यह सुनना हमारा कर्तव्य है। एसजी के पास सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज और सामग्री है प्रतिवादी प्रस्तुत करते हैं कि सील बंद लिफाफे में दस्तावेज जमा करने की प्रथा को इस अदालत के एक नवीनतम निर्णय द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है राज्य का कहना है कि यदि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर विचार किया जाता है तो राज्य भी सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज रखने के इच्छुक है इसलिए हम चाहते हैं कि वकील ऐसी सामग्री रखी जिस पर राज्य भी भरोसा करना चाहता है दोनों सीलबंद लिफाफे मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों के आवास पर भेजे जाएं हम याचिकाओं के सुनवाई होने के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं के लोकस पर भी प्रस्तुतियां चाहते हैं उत्तर दाताओं में से एक ने हमारा ध्यान खींचा है कि याचिकाकर्ता द्वारा जांच किए जाने वाले 170 गवाहों की जांच की गई जिसमें अंतिम गवाह जांच अधिकारी है हमें यह भी अवगत कराया गया है कि ईडी द्वारा आवेदन के निपटान तक ट्राई कोर्ट के सुनवाई को स्थगित करने की मांग की गई है इस संबंध में मामले पर 24 सितंबर को विचार किया जाएगा। साक्षीयों के निष्कर्ष के बाद सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किए जाने पर विचार किया जाना है। उस अभ्यास को करने के लिए अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है प्रशांत भूषण ने हस्तक्षेप करता प्रदीप श्रीवास्तव की ओर से प्रस्तुत किया है कि जांच में जरूरी बहुत कुछ छोड़ दिया है उनका कहना है कि जांच की गुणवत्ता सही नहीं है। स्वतंत्र एजेंसी में ट्रांसफर होने के बाद भी जांच की प्रक्रिया की निगरानी अदालत द्वारा की जाए हमें अभी इन सवालों में जाने की जरूरत नहीं है पहले मामले में हम सुनवाई योग्य होने पर विचार करेंगे। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ का नाम घोटाला मामला भाजपा , कांग्रेस और छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका के लिए बेहद तनाव से गुजरने वाला है।