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कोयला परिवहन की शर्तें ऐसी की प्रतिस्पर्धा, हो जाए समाप्त

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समाचार -
बिलासपुर, नवंबर 26। 
 
बिजली विभाग के कुछ आला अधिकारी एक टेंडर को मैनेज करने के लिए निविदा की शर्तों में कुछ विशेष शर्त लगा रहे हैं कोयला परिवहन के पिछले ठेकों में सरकार को हुई नुकसान की भरपाई अब इस तरीके से की जाने वाली है। बताया जाता है कि घटिया कोयले की सप्लाई के चलते विद्युत उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। कोयले की खपत ज्यादा हुई पर बिजली का उत्पादन कम हुआ ऐसे में कोयला सप्लाई करने वाली कंपनी को नोटिस भी जारी हुआ अलग-अलग नोटिस में करीब 100 करोड़ के नुकसान की भरपाई के निर्देश दिए गए थे। इस मामले में कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्यवाही भी फाइलों में बंद कर दी गई। मौजूदा कोयला परिवहन ₹300 प्रति टन बाजार भाव पर किया जा रहा है। विद्युत मंडल से ₹800 प्रति टन से वसूली हो रही है और कोयले की गुणवत्ता भी बिगड़ गई है। एक पुरानी कंपनी से जुड़ी हुई सेल कंपनियां फिर से ठेका लेने के लिए सक्रिय है। दिग्गज, महारत्न, मिनी रत्न जिनमें सेंट्रल कोलफील्ड, कोल इंडिया, एनटीपीसी आदि ने किसी भी राज्य में स्थित कोयला उत्खनन परिवहन किसी भी राज्य विशेष के संस्थान निकाय या ठेकेदार को ही कोयला उत्खनन या परिवहन हेतु अधिकृत किए जाने की ऐसी बाध्यकारी शर्तें नहीं लगाई जैसी सीजी, पीजीसीएल द्वारा गारे पालमा कोयला खान से कोयला परिवहन हेतु लगाई जा रही है। निविदा में जैसी शर्ते रखी गई है उससे खुली प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाएगी ऐसा लगता है कि अतिरिक्त शर्तें किसी एक विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए रखी गई है।